देहरादून/मसूरी । पहाड़ों की रानी मसूरी का देश की आजादी के आंदोलन से भी गहरा नाता रहा है। अंग्रेजी शासन की जड़ों को उखाड़ने के लिए देश के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी अक्सर यहां रणनीति बनाने के लिए एकत्र होते थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी दून और मसूरी की वादियों में आजादी की लड़ाई के लिए अहम रणनीतियां तैयार की थीं। आजादी से पहले बापू दो बार मसूरी आए और यहां सभाएं कर मसूरीवासियों के जेहन में आजादी के ऐसे बीज रोपे कि हजारों लोग आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। गांधी जी को मसूरी की वादियों में मानसिक शांति मिलती थी। इतिहासकार गोपाल भारद्वाज बताते हैं, मसूरी के बारे में गांधी जी कहा करते थे कि यहां की सुंदर पहाड़ियों को देखकर मैं अपने सारे दुख दर्द भूल जाता हूं।

इतिहासकार गोपाल भारद्वाज बताते हैं कि आजादी के आंदोलन के सिलसिले में महात्मा गांधी दो बार मसूरी आए थे। पहली बार महात्मा गांधी मसूरी वर्ष 1929 में आए। तब वह किसी कार्यक्रम में शिरकत करने देहरादून आए थे। इसी दौरान वह दो दिन के लिए मसूरी भी पहुंचे। वह यहां हैप्पी वैली स्थित चार्लविली होटल में ठहरे थे। इसके बाद वह जून 1946 में मसूरी आए। इस प्रवास में वह एक सप्ताह तक हैप्पी वैली में ही बिरला हाउस में ठहरे थे। तब राजकुमारी अमृत कौर ने महात्मा गांधी को मसूरी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य राजगुरु ऋषि भारद्वाज के बारे में बताया था। भारद्वाज के बारे में सुनने के बाद गांधी जी ने उनसे मिलने की इच्छा जताई। ऋषि भारद्वाज खुद बिरला हाउस पहुंचे और गांधी जी से भेंट की।
गोपाल भारद्वाज बताते हैं कि मसूरी में द्वितीय प्रवास के दौरान गांधी जी रोजाना शाम को कुलड़ी स्थित सिल्वरटन मैदान में प्रवचन किया करते थे। यहां गांधी जी को सुनने के लिए भारी जनसमुदाय एकत्रित हो जाता था। गांधी जी उस समय मसूरी में तत्कालीन कांग्रेस के बड़े नेताओं में शामिल पुष्कर नाथ तन्खा के सहयोग से रणनीति बनाते थे।
आजादी के आंदोलन पर चिंतन-मनन को आते थे स्वंतत्रता सेनानी
अंग्रेजों को मसूरी बहुत प्रिय थी, लेकिन आजादी के आंदोलन को दिशा देने वाली महत्वपूर्ण रणनीति भी यहीं बनीं। पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ ही पं. गोविंद बल्लभ पंत, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुचेता कृपलानी, कृष्णा मेनन, केएल. मुंशी, सरोजनी नायडू जैसी हस्तियां मसूरी आकर आजादी के आंदोलन पर चिंतन-मनन करने के साथ ही आगे की रणनीति बनाते थे। उन दिनों मसूरी के मलिंगार और होटल हैकमैंस के फालतू लाइन में अंग्रेजों के खिलाफ योजनाएं बनाई जाती थीं।
गांधी जी के कार्यक्रमों के लिए बनवाया गया विशेष भवन
गोपाल भारद्वाज बताते हैं कि गांधी जी जब पहली बार मसूरी आए थे तो नगर के संभ्रांत नागरिकों ने बैठक बुलाकर तय किया कि एक ऐसा भवन बनाया जाए, जिसमें गांधी जी के आने पर कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें। वर्ष 1947-48 में यह भवन बनकर तैयार हुआ, जिसको आज श्री गांधी निवास सोसायटी के नाम से जाना जाता है। इसी परिसर में आज सरस्वती विद्यामंदिर इंटर कॉलिज संचालित होता है।
खारा खेत में बना था नमक
महात्मा गांधी द्वारा वर्ष 1930 में नमक कानून के खिलाफ छेड़ी गई लड़ाई में देहरादून के खारा खेत के निवासियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। यह वही जगह है, जहां स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन से जुड़े ग्रामीणों ने नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा था। इसकी याद में यहां एक स्तंभ भी बनाया गया है।



