Uttarakhand

उत्तराखंड में आने वाले दिनों में हर खेत तक पहुंचेगा पानी

देहरादून। फसलों का उत्पादन बढ़ाना है तो इसके लिए खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाना आवश्यक है। इस लिहाज से देखें तो उत्तराखंड की तस्वीर बहुत बेहतर नहीं कही जा सकती। राज्य के 95 विकासखंडों में से 71 में खेती इंद्रदेव की कृपा पर है। यानी वक्त पर बारिश हो गई तो ठीक, अन्यथा बिना पानी सब सून। सिंचाई सुविधा का आलम ये है कि पर्वतीय भूभाग में केवल 45 हजार हेक्टेयर में ही सिंचाई की सुविधा अब तक उपलब्ध हो पाई है। इस सबको देखते हुए अब केंद्र और राज्य सरकार, दोनों ने सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने पर फोकस किया है, ताकि फसलोत्पादन में बढ़ोतरी होने से किसानों की आय दोगुना हो सके। इस दिशा में प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं। कोशिशें रंग लाईं तो निकट भविष्य में राज्य के 8.82 लाख किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। आइये, नजर डालते हैं सिंचाई सुविधाएं विकसित करने को मुख्य योजनाओं के बारे में।कृषि उत्पादकता में बढ़ोतरी के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) शुरू की है। इसके तहत चयनित होने वाली योजनाओं में केंद्र सरकार 90 फीसद मदद मुहैया कराएगी, जबकि 10 फीसद राज्य का अंश होगा। इस योजना में प्रदेश सरकार ने कई योजनाएं प्रस्तावित की हैं, जो जल्द ही धरातल पर उतरेंगी।आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 के अनुसार इस योजना का मुख्य लक्ष्य सिंचाई में निवेश के अभिसरण प्राप्त करना है। साथ ही सुनिश्चित सिंचाई के तहत कृषि योग्य क्षेत्र का विकास करना, खेत में सिंचाई की विधि में सुधार कर पानी के अपव्यय को कम करना भी योजना का मंतव्य है। इसके अलावा जल संचय के लिए टैंक, तालाब, चैकडैम संरचनाओं का निर्माण, स्प्रिंकलर व टपक सिंचाई पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान ही योजना में 6.66 करोड़ की लागत से कार्य कराए जा रहे हैं।सिंचाई साधनों के विकास के लिए लघु सिंचाई के माध्यम से भूमिगत व सतही जल स्रोतों के विकास के लिए नवीनीकरण, जीर्णोद्धार, वर्षा जल संरक्षण, जल वितरण प्रणाली का सुदृढ़ीकरण, जल प्रबंधन में बढ़ोतरी, कंमाड एरिया के कम से कम 10 फीसद क्षेत्र को माइक्रो सिंचाई के तहत लाना जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि इस योजना के तहत हर खेत तक पानी पहुंचाने के प्रयास किए जाएं।